बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने अपनी जिंदा बेटी को मृत मानकर उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया। यह घटना मड़वन प्रखंड के जियन खुर्द गांव की है, जहां पंचायत के कथित सामाजिक दबाव के कारण परिजनों को यह कदम उठाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, गांव की 20 वर्षीय युवती ने करीब एक महीने पहले अपनी मर्जी से प्रेम विवाह किया था। युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी, जिसके बाद परिजनों ने करजा थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में पुलिस ने युवती को बरामद कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट में युवती ने खुद को बालिग बताते हुए युवक के साथ शादी करने और उसी के साथ रहने की इच्छा जताई। इसके बाद अदालत के आदेश पर पुलिस ने युवती को उसके ससुराल भेज दिया।
युवती के इस फैसले के बाद गांव के कुछ लोगों ने परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। पंचायत स्तर पर कथित तौर पर यह फैसला लिया गया कि गांव का कोई भी व्यक्ति उस परिवार से कोई सामाजिक संबंध नहीं रखेगा। यहां तक कहा गया कि जो भी परिवार से मेलजोल रखेगा, उसके खिलाफ भी सामाजिक कार्रवाई होगी।
परिजनों का आरोप है कि पंचायत की ओर से उन्हें समाज में दोबारा शामिल करने के लिए एक शर्त दी गई—बेटी को मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार करना होगा। सामाजिक दबाव और बहिष्कार से परेशान परिवार ने रविवार को अपनी जीवित बेटी का पुतला बनाया, अर्थी सजाई और पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ शव यात्रा निकाली। बाद में श्मशान घाट में मंत्रोच्चारण के बीच पुतले का दाह संस्कार कर दिया गया।
स्थानीय मुखिया विकास कुमार सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि परिवार ने समाज में दोबारा शामिल होने के दबाव में यह कदम उठाया। वहीं करजा थानाध्यक्ष रामकृष्ण परमहंस ने बताया कि युवती बालिग है और उसने अपनी मर्जी से शादी की है। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है कि क्या परिवार पर किसी तरह का दबाव बनाया गया था।
यह घटना एक बार फिर समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, प्रेम विवाह और सामाजिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


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